The Circulatory System Notes Pdf

The Circulatory System Welcome all of you guys to Hello Students alltipstricks.com. So today we have brought for you an important PDF file related to Biology. Which is very helpful PDF for preparing for your SSC, CGL, Bank, Railway, and other competitive exams. Questions related to Biology are often asked in competitive exams, this PDF is very useful for those who are preparing for Students Medical. To download this Handwritten Notes PDF, you can easily get the PDF by clicking on the download Button given below to download in your mobile or laptop or PC.

Always visit our website daily to download Current Affairs, GK Notes, Study Materials, Monthly Magazines FREE and prepare for your upcoming Competitive Exams in a simple way. Your friends can also SHARE via WhatsApp, join Telegram Facebook, so that more students can get PDF BOOK for free.

परिसंचरण तन्त्र ( The Circulatory System )

संचार प्रणाली बहुकोशिकीय जीवों के शरीर में द्रव या संवहनी संयोजी ऊतक है जो पचे हुए पोषक तत्वों, ऑक्सीजन, हार्मोन, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य उत्सर्जित पदार्थों के परिवहन का कार्य करता है। इस लेख में मानव शरीर से संबंधित उल्लेख है। जिस तरह हम बस या ट्रेन से एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, उसी तरह इस काम के लिए शरीर में एक व्यापक पाइपलाइन प्रणाली होती है। इसे संचार प्रणाली कहा जाता है। शरीर और पर्यावरण के बीच और शरीर के विभिन्न ऊतकों के बीच पदार्थों का लगातार रासायनिक आदान-प्रदान इस प्रणाली के माध्यम से होता है।

कार्य

हमारे शरीर में परिसंचरण तन्त्र के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—खाद्य पदार्थों का परिवहन

परिसंचरण तन्त्र आहारनाल  में पचे हुए खाद्य पदार्थों को शरीर की विभिन्न  कोशिका तक पहुँचाता है।ऑक्सीजन का परिवहन

यह तन्त्र ऑक्सीजन फेफड़ों की वायु कूपिकाओं से ग्रहण करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाता है।कार्बन डाइ ऑक्साइड का परिवहन

कोशिकीय  में उत्पन्न CO2 को फेफड़ों तक परिवहन का कार्य परिसंचरण तन्त्र ही करता है।उत्सर्जी पदार्थों का परिवहन

ऊतकों व कोशिकाओं में उपापचय के फलस्वरूप बने उत्सर्जी या अपशिष्ट पदार्थों के परिसंचरण तन्त्र के द्वारा ही उत्सर्जी अंगों तक पहुँचाया जाता है।हार्मोन्स का परिवहन

परिसंचरण तन्त्र हार्मोन्स को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।

शरीर के तापमान का नियमन

परिसंचरण तन्त्र शरीर के तापमान को स्थिर बनाए रखने का महत्त्वपूर्ण कार्य करता है।समस्थैतिकता बनाए रखना

 जल तथा हाइड्रोजन आयनों (H+) एवं रासायनिक पदार्थों के वितरण द्वारा शरीर के सभी भागों में आन्तिरिक समस्थैतिकता को बनाए रखता है।शरीर की रोगों से रक्षा करना

शरीर के प्रतिरक्षी तन्त्र का भी कार्य करता है। यह शरीर में प्रवेश करने वाले रोगाणुओं से शरीर की रक्षा करता है।

उपर्युक्त कार्यों के क्रियान्वन हेतु परिसंचरण तन्त्र में दो प्रकार के तरल पदार्थ होते हैं—

  • रुधिर एवं
  • लसिका

ये दोनों ही तरल, एक–दूसरे से पृथक, अनेक छोटी–छोटी वाहिनियों के माध्यम से शरीर के समस्त भागों में पहुँचते रहते हैं। अतः परिसंचरण तन्त्र को दो तन्त्रों में विभाजित किया गया है—

  • रुधिर परिसंचरण तन्त्र
  • लसिका तन्त्र

Download pdf of The Circulatory System handwritten notes :

This can be done by CLICK on the DOWNLOAD Link given below for FREE DOWNLOAD to Haryana General Knowledge Handwritten Notes and read it carefully. i will provide all material time to time.Thanks

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *